आशीर्वाद

महान संपन्न भारत की नींव।।

सोमवार, 24 जनवरी 2011

गणतंत्र दिवस

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आशीर्वाद

आधुनिक समय में भ्रष्टाचार, अशांति व्याप्त है। भारतीय संस्कृति अपने महत्त्व को खोती जा रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि भारतीयों में जागरूकता लाई जाए पर क्या यह संभव है???

हाँ संभव है पर इसके लिए आवश्यक है बाल-गोपाल में शिक्षा एवं संस्कार के प्रति लगन जगाना ताकि जब वे पढ़-लिखकर समाज का एक अंग बने तो वे भ्रष्टाचार आदि बुराइयों से दूर रहें, भारतीय संस्कृति के अनुयायी बनें और परमार्थी बनें, राष्ट्र कल्याण की भावना को सर्वोपरि महत्त्व दें।

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जी हाँ, आशिर्वाद भी एक संस्था है जो उन्हीं स्वयंसेवी संस्थाओं की तरह है जो कल्याण हेतु काम कर रही हैं पर हमारी सोच अलग है, हमारे कार्य करने की शैली अलग है। हम जानते हैं कि अगर राष्ट्र को शक्तिशाली, सुख-संपन्न, अशांतिरहित बनाना है तो इसके लिए आवश्यक है बच्चों को जागरुक बनाना।

हाँ हमें पता है कि हमारा लक्ष्य हमसे बहुत दूर है पर हमें यह भी पता है कि जिस दिन हमारी संस्था के निर्देशन में पलित-पल्लवित बच्चे एक दिन युवा बनकर देश के विकास में सहभागी होंगे वहीं से भारतीयता का स्वर्ण-युग आरम्भ होगा।

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